मेजा तहसील दिवस में 374 शिकायतों में सिर्फ 8 का निस्तारण

मेजा तहसील दिवस में 374 शिकायतों में सिर्फ 8 का निस्तारण

नायब तहसीलदार मांडा आकांक्षा बाजपेयी और लेखपाल प्रगति मिश्रा को बनाया गया तहसील प्रभारी, जिम्मेदार अधिकारियों की अनुपस्थिति पर उठे सवाल

आदर्श सहारा टाइम्स

मेजा, प्रयागराज।जनसमस्याओं के त्वरित और प्रभावी निस्तारण के उद्देश्य से आयोजित होने वाला तहसील दिवस अब महज औपचारिकता बनकर रह गया है। शनिवार को मेजा तहसील में आयोजित तहसील दिवस में कुल 374 शिकायतें प्राप्त हुईं, लेकिन इनमें से महज 8 शिकायतों का ही निस्तारण हो सका। शेष शिकायतों के समाधान की उम्मीद लेकर तहसील पहुंचे फरियादियों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा।
तहसील दिवस में नायब तहसीलदार मांडा आकांक्षा बाजपेयी और लेखपाल प्रगति मिश्रा को तहसील प्रभारी बनाया गया था। आरोप है कि जनसमस्याओं की सुनवाई के लिए अपेक्षित अधिकारियों की उपस्थिति नहीं रही। ऐसे में फरियादियों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए इंतजार और परेशानी का सामना करना पड़ा।
374 शिकायतें, निस्तारण केवल 8 का
तहसील दिवस का उद्देश्य राजस्व, भूमि विवाद, रास्ते, पैमाइश और अन्य जनसमस्याओं का समयबद्ध समाधान करना है, ताकि आम लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। लेकिन जब एक ही दिन में 374 शिकायतें पहुंचें और उनमें से केवल 8 का निस्तारण हो, तो व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अपनी समस्याओं के समाधान की आस लेकर तहसील पहुंचे फरियादियों को उम्मीद थी कि उनकी शिकायतों पर गंभीरता से सुनवाई होगी और उन्हें राहत मिलेगी। हालांकि, अधिकांश शिकायतों का निस्तारण नहीं होने से लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा।
आखिर कब होगा शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण?
तहसील दिवस में बड़ी संख्या में शिकायतें आना इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में लोगों की समस्याएं कम नहीं हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब शिकायतों के निस्तारण के लिए विशेष आयोजन किया जाता है, तो अधिकांश फरियादियों को तत्काल राहत क्यों नहीं मिल पाती? क्या संबंधित अधिकारियों की पर्याप्त उपस्थिति सुनिश्चित नहीं की जा सकती? और क्या लंबित शिकायतों के निस्तारण की नियमित समीक्षा की जाती है?
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए लंबित शिकायतों के निस्तारण के लिए क्या कदम उठाता है। यदि तहसील दिवस में भी फरियादियों को राहत नहीं मिलती, तो जनसुनवाई के इन आयोजनों का वास्तविक उद्देश्य कैसे पूरा होगा।

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