राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज का 21वाँ दीक्षांत समारोह संपन्न

 

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज का 21वाँ दीक्षांत समारोह संपन्न

प्रयागराज ज्ञान, न्याय, आस्था और स्वतंत्रता सेनानियों की पावन धरा : उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय

दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि नए जीवन में प्रवेश : उच्च शिक्षा मंत्री

मुक्त विश्वविद्यालय से डिग्री पाना गौरव की बात, युवाओं के दम पर 2047 में विकसित भारत बनेगा : उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी

 

आदर्श सहारा टाइम्स

प्रयागराज । उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में शुक्रवार को उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज का 21वाँ दीक्षांत समारोह संपन्न हुआ।

समारोह को संबोधित करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि प्रयागराज के बारे में सबसे सार्थक उक्ति है – ‘प्रयागे प्रविष्टमात्रे पापम् नश्यति’ अर्थात प्रयाग में प्रवेश करते ही सब पाप नष्ट हो जाते हैं। मान्यता है कि ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना के बाद इतने विशाल कार्य के उपरांत यज्ञ और अनुष्ठान के लिए इसी पावन भूमि को चुना था, इसलिए यहाँ आने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। यह अध्यात्म की भूमि है, धार्मिक चेतना की भूमि है, न्याय, ज्ञान और आस्था की नगरी है, स्वतंत्रता की बलिवेदी पर मर-मिटने वाले बलिदानियों की धरा है। बड़े-बड़े साहित्यकारों ने साहित्य को नई दिशा दी, ऐसी साहित्यकारों की भूमि रही है। जिस शहर में गंगा, यमुना, सरस्वती प्रवाहित होती हैं, जहाँ संगम होता है, वह तीर्थ बड़ा है। इसीलिए प्रयाग के आगे राज लगता है और यह प्रयागराज कहलाता है।

मंत्री उपाध्याय ने कहा कि ऐसी पावन भूमि पर यह विश्वविद्यालय है जो राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन जी के नाम पर है। वे इसी प्रयाग की भूमि में जन्मे एक ऐसे नेता थे जिन्होंने देश को दिशा दी। तीन तरह के नेता होते हैं – एक राजनेता जो इलेक्शन टू इलेक्शन सोचता है, 5 साल के बारे में सोचता है, अगला चुनाव कैसे जीता जाए इसकी योजना बनाता है। दूसरे जो आने वाले दशकों के बारे में सोचते हैं और तीसरे होते हैं राष्ट्रनेता जो आने वाली पीढ़ियों के बारे में सोचते हैं, शताब्दियों की योजना बनाते हैं। ऐसे राष्ट्रनेता थे राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन जी, जो एक साधारण परिवार से निकलकर भारत रत्न तक पहुंचे। आप ऐसे विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं जिसके नाम से ही प्रेरणा मिलती है।

उन्होंने कहा कि आज जिन छात्रों ने उपाधियां प्राप्त की हैं, मैं उनको और उनके माता-पिता को बधाई देता हूं। बच्चों को यह ख्याल रखना होगा कि आपकी इस उपलब्धि के पीछे आपके माता-पिता का त्याग, परिश्रम और संघर्ष छिपा है। उन्होंने अपनी इच्छाओं का दमन कर, पेट काटकर आपको पढ़ाया होगा। गुरुजनों ने कंधे से कंधा मिलाकर दिशानिर्देश दिया। इसलिए हमारी संस्कृति कहती है – मातृदेवो भव, पितृदेवो भव, आचार्यदेवो भव। इनके ऋण से हम कभी उऋण नहीं हो सकते।

उन्होंने कहा कि यह दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि नए जीवन में प्रवेश है। यह मुक्त विश्वविद्यालय संदेश देता है कि शिक्षा ग्रहण करने की कोई उम्र नहीं है। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार पाना नहीं है। शिक्षा वह है जो संस्कारित नागरिक बनाए, समाज के प्रति संवेदनशीलता दिखाए, सामाजिक सरोकारों से जोड़े और राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव जगाए। वही शिक्षा विकसित भारत के निर्माण में योगदान दे सकती है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का विकसित भारत का विजन तभी पूरा होगा।

उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि मेरे लिए बहुत प्रसन्नता की बात है कि आप सभी ने ऐसे विश्वविद्यालय से उपाधियां प्राप्त की हैं जो राज्य का एकमात्र मुक्त विश्वविद्यालय है, जहाँ नौकरी पेशा, विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत, घर से बाहर न जा पाने वाली महिलाएं, दिव्यांगजन और विषम परिस्थितियों के कारण नियमित शिक्षा न ले सकने वाले छात्र-छात्राएं डिग्री लेते हैं। आपने केवल उपाधि नहीं, पदक भी प्राप्त किए हैं।

उन्होंने कहा कि आप ऐसे समय पर डिग्री प्राप्त कर रहे हैं जब देश में अनेकों संभावनाएं हैं। आज टेक्नोलॉजी, ज्ञान-विज्ञान और अध्यात्म का संगम हमारे पास है। जब यशस्वी प्रधानमंत्री कहते हैं कि 2047 में देश पूर्ण विकसित होगा, तो वह आप जैसे युवाओं के दम पर कहते हैं। मुझे प्रसन्नता है कि आज गोल्ड मेडल प्राप्त करने वालों में ज्यादातर बेटियां हैं। डबल इंजन की सरकार लगातार विकास के साथ-साथ देश की सीमाओं को भी सुरक्षित रख रही है।

राज्य मंत्री तिवारी ने कहा कि आज मंच पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल विराजमान हैं, उन्होंने अपनी सेवा एक शिक्षिका के रूप में शुरू की और सेवा भाव से आगे बढ़ती गईं। कोई व्यक्ति ऐसे ही असाधारण नहीं बनता, अनेक चुनौतियों को पार करके व्यक्ति आगे बढ़ता है। मैंने देखा है कि उनके शब्दकोश में आराम जैसा कोई शब्द नहीं है। वे हम सबके लिए प्रेरणा हैं। उनके मार्गदर्शन में हमारे विश्वविद्यालय और कॉलेज ही नहीं, आंगनवाड़ी केंद्र भी आगे बढ़ रहे हैं।

 

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