स्वस्थ रहने के लिए शुद्ध पेयजल जरूरी, दूषित पानी से बढ़ सकता है बीमारियों का खतरा,डॉ आर के कुशवाहा

स्वस्थ रहने के लिए शुद्ध पेयजल जरूरी, दूषित पानी से बढ़ सकता है बीमारियों का खतरा,डॉ आर के कुशवाहा

आदर्श सहारा टाइम्स

कोरांव, प्रयागराज। स्वस्थ जीवन के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है कि पानी शुद्ध और सुरक्षित हो। शरीर के तापमान को नियंत्रित करने, पाचन, रक्त संचार, पोषक तत्वों के परिवहन और शरीर से अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकालने में पानी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
दूषित पेयजल कई जलजनित बीमारियों का कारण बन सकता है। गंदे पानी में बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी मौजूद हो सकते हैं, जिससे दस्त, उल्टी, पेचिश, हैजा, टाइफाइड और हेपेटाइटिस-ए जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
बरसात में बढ़ जाता है खतरा
बरसात के मौसम में नालियों, खेतों और अन्य दूषित स्रोतों का पानी भूजल या पेयजल स्रोतों तक पहुंच सकता है। कोरांव और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कई स्थानों पर भूजल स्तर अपेक्षाकृत ऊंचा होने के कारण प्राकृतिक छनाव कम हो सकता है। खेतों में जमा पानी, नहरों और नालों का दूषित पानी तथा खराब या असुरक्षित पाइपलाइन भी भूजल को प्रभावित कर सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार हैंडपंप और शौचालय या सेप्टिक टैंक के बीच पर्याप्त दूरी रखना जरूरी है। सामान्य रूप से हैंडपंप को संभावित प्रदूषण के स्रोतों से सुरक्षित दूरी पर स्थापित किया जाना चाहिए। स्थानीय मिट्टी, भूजल की दिशा और जलस्तर के अनुसार दूरी तय करना अधिक सुरक्षित रहता है।
पानी की गुणवत्ता की जांच जरूरी
सिर्फ यह मान लेना कि अधिक गहराई से निकला पानी स्वतः पीने योग्य होगा, सही नहीं है। भूजल में क्षेत्र के अनुसार फ्लोराइड, आर्सेनिक, नाइट्रेट, आयरन तथा अन्य रासायनिक तत्व भी हो सकते हैं। इसलिए समय-समय पर पानी की गुणवत्ता की जांच कराना बेहद जरूरी है।
यदि पानी की शुद्धता पर संदेह हो तो उसे अच्छी तरह उबालकर पीना संक्रमण से बचाव का सरल उपाय है। उबले पानी को साफ और ढके हुए बर्तन में रखना चाहिए।
फिल्टर और आरओ का इस्तेमाल सोच-समझकर करें
पानी का फिल्टर तभी प्रभावी है जब उसका सही तरीके से रखरखाव और समय-समय पर सफाई की जाए। केवल घर में फिल्टर या आरओ लगवा लेना पानी की सुरक्षा की गारंटी नहीं है।
RO की जरूरत पानी की गुणवत्ता और उसमें मौजूद घुले हुए पदार्थों पर निर्भर करती है। केवल TDS के आधार पर यह तय करना उचित नहीं है कि कौन-सा पानी स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है। पानी की जांच के बाद ही उपयुक्त फिल्ट्रेशन सिस्टम का चुनाव करना बेहतर है।
स्वच्छ पानी के साथ स्वच्छ आदतें भी जरूरी
पेयजल को हमेशा साफ और ढके हुए बर्तन में रखना चाहिए। पानी निकालने के लिए साफ बर्तन या करछुल का इस्तेमाल करें। भोजन से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ धोना जलजनित संक्रमणों से बचाव का महत्वपूर्ण उपाय है। खुले में शौच से बचना और शौचालय का उपयोग करना भी जरूरी है।
स्वच्छ पानी केवल स्वास्थ्य की जरूरत नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाना, समय-समय पर पानी की जांच कराना और लोगों को सुरक्षित पेयजल के प्रति जागरूक करना ही स्वस्थ समाज की मजबूत नींव बन सकता है। आज पानी को सुरक्षित रखेंगे, तभी आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित जल उपलब्ध करा पाएंगे।

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