बरसात में बीमारी से बचना है तो बरतें सतर्कता, छोटी लापरवाही पड़ सकती है भारी

बरसात में बीमारी से बचना है तो बरतें सतर्कता, छोटी लापरवाही पड़ सकती है भारी

डेंगू-मलेरिया से लेकर डायरिया तक का बढ़ता खतरा, स्वच्छता और सावधानी को बनाया जाए सुरक्षा कवच : डॉ. आर. के. कुशवाहा

आदर्श सहारा टाइम्स

कोरांव,प्रयागराज। बरसात का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन इसके साथ ही कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। जलभराव, दूषित पानी, मच्छरों की बढ़ती संख्या और अस्वच्छ भोजन के कारण डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, टाइफाइड, डायरिया, हैजा सहित विभिन्न संक्रमण तेजी से फैल सकते हैं। ऐसे में थोड़ी सी सावधानी न केवल बीमारी से बचा सकती है, बल्कि गंभीर जटिलताओं को भी रोक सकती है।

घर के आसपास पानी जमा न होने दें

बरसात के दिनों में घर, छत, गमलों, कूलर, पुराने टायर और टूटे बर्तनों में जमा पानी मच्छरों के लिए प्रजनन स्थल बन जाता है। इसलिए पानी को नियमित रूप से खाली करें और पानी के सभी स्रोतों को ढककर रखें।

मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी, मच्छररोधी साधनों और पूरी बांह के कपड़ों का इस्तेमाल करें। आसपास साफ-सफाई रखने से डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

दूषित पानी और अस्वच्छ भोजन से रहें सावधान

बरसात में दूषित पानी और भोजन के सेवन से डायरिया, टाइफाइड और अन्य आंतों के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। पीने के लिए हमेशा स्वच्छ एवं सुरक्षित पानी का प्रयोग करें। आवश्यकता पड़ने पर पानी को उबालकर या विश्वसनीय तरीके से शुद्ध करके ही पिएं।

खुले में बिकने वाले कटे फल, बासी भोजन और अस्वच्छ स्थानों पर तैयार खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए। बाजार में मिलने वाले अस्वच्छ तरीके से तैयार फलों के जूस से भी सावधानी बरतें, क्योंकि दूषित पानी, बर्फ, गंदे बर्तन और संक्रमित हाथों के कारण इसमें रोगाणु पहुंच सकते हैं।

दस्त को सामान्य समझना पड़ सकता है भारी

गंभीर दस्त के कारण शरीर में पानी और आवश्यक लवणों की तेजी से कमी हो सकती है। इससे निर्जलीकरण की स्थिति उत्पन्न होने के साथ गुर्दों की कार्यक्षमता भी प्रभावित हो सकती है।

दस्त होने पर ओआरएस का घोल और पर्याप्त तरल पदार्थ देना चाहिए। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर मरीजों में विशेष सावधानी बरतना जरूरी है।

बहुत अधिक कमजोरी, पेशाब कम या बंद होना, लगातार उल्टी, चक्कर, बेहोशी, खून वाले दस्त या तेज बुखार जैसे लक्षण दिखाई दें तो तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

बुखार आए तो खुद से दवा लेने के बजाय कराएं जांच

बरसात में बुखार के साथ सिरदर्द, बदन दर्द, उल्टी, त्वचा पर दाने या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों में समय पर जांच और उचित उपचार बेहद महत्वपूर्ण है।

बुखार के दौरान पर्याप्त आराम और तरल पदार्थों का सेवन करें तथा बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक या अन्य दवाओं का सेवन करने से बचें।

स्वच्छता, जागरूकता और समय पर उपचार ही बचाव का आधार

डॉ. आर. के. कुशवाहा ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि बरसात के मौसम में स्वच्छता को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। घर और आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरों से बचाव करें, स्वच्छ पानी और सुरक्षित भोजन का सेवन करें तथा बीमारी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें।

उन्होंने कहा कि संचारी रोगों से बचाव केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है। जागरूकता और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेकर कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।

डॉ. आर. के. कुशवाहा
MBBS, MS, FIAGES, FISCP, FCLS, FMAS

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