संजीवनी लेकर लौटे हनुमान, लक्ष्मण के प्राण बचते ही गूंजे जयकारे
महेवा कला की 111वें वर्ष की रामलीला में अंगद-रावण संवाद, विभीषण शरणागति और लक्ष्मण शक्ति का मंचन
आदर्श सहारा टाइम्स
मांडा, प्रयागराज। मेघनाद के ब्रह्मास्त्र से लक्ष्मण के मूर्छित होने पर रामदल में छाई चिंता और संजीवनी लेकर लौटे हनुमान के पहुंचते ही बदला माहौल। रविवार रात महेवा कला गांव की 111वें वर्ष की रामलीला में लक्ष्मण शक्ति की लीला के इस प्रसंग ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। लक्ष्मण की मूर्छा दूर होते ही रामलीला मैदान जय श्रीराम और जय हनुमान के उद्घोष से गूंज उठा।
इससे पहले मंच पर विभीषण शरणागति और अंगद-रावण संवाद का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। माता सीता को लौटाकर युद्ध टालने की सलाह देने पर रावण ने अपने भाई विभीषण को चरण प्रहार कर लंका से निष्कासित कर दिया। श्रीराम ने शरण में आए विभीषण को स्वीकार करते हुए उन्हें लंका का राजा बनाने की घोषणा की। वहीं, युद्ध रोकने के उद्देश्य से शांति दूत बनकर पहुंचे अंगद की बात भी रावण ने अनसुनी कर दी और युद्ध पर अड़ा रहा।
युद्ध में लक्ष्मण के मूर्छित होने पर सुषेण वैद्य ने संजीवनी बूटी को उनके प्राण बचाने का उपाय बताया। हनुमान द्रोणागिरी पर्वत से संजीवनी लाने निकल पड़े। मार्ग में कालनेमि का वध और भरत से मिलाप के बाद वह बूटी लेकर रामदल पहुंचे।
राम के रूप में सुंदरम पांडेय, लक्ष्मण के रूप में करन, अंगद पत्रकार संदीप मिश्र, हनुमान के रूप में देवी प्रसाद वैश्य, जामवंत के रूप में मानस मिश्रा, रावण के रूप में अश्वनी श्रीवास्तव और मेघनाद के रूप में अविनाश शर्मा ने अभिनय किया। कलाकारों के मंचन की दर्शकों ने सराहना की।
