दिवाली की शाम मांडा खास के काली माता चौराहे पर उमड़ी श्रद्धालुओं और खरीदारों की भीड़, रोशनी के त्योहार का दिखा अनोखा उत्साह
दीपोत्सव पर लोगों ने खरीदीं पूजा सामग्रियां, फूल-मालाएं और आतिशबाजी; जगमगा उठे घर-आंगन
आदर्श सहारा टाइम्स
मांडा खास (प्रयागराज)। प्रकाश और उल्लास के पावन पर्व दिवाली के शुभ अवसर पर मांडा खास स्थित प्रसिद्ध काली माता चौराहे पर लोगों की जबरदस्त चहल-पहल और भारी भीड़ देखने को मिली। शाम होते ही पूरा बाजार रंग-बिरंगी रोशनी और श्रद्धालुओं के उत्साह से सराबोर हो गया।
त्योहार को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखा गया। अपने घरों को रोशन करने और मां लक्ष्मी व भगवान श्री गणेश की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के लिए लोगों ने दीये, रुई की बत्तियां और फूल-मालाओं की जमकर खरीदारी की। वहीं, बच्चों में आतिशबाजी को लेकर विशेष उमंग दिखी, जिसके लिए अभिभावकों ने पटाखों की दुकानों से उनकी पसंद के पटाखे खरीदे।
क्यों मनाया जाता है दिवाली का त्योहार?
सनातन परंपरा में दिवाली केवल दीप जलाने का पर्व नहीं, बल्कि अधर्म पर धर्म और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है:
भगवान श्री राम का आगमन: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम 14 वर्षों के वनवास और लंकापति रावण का वध करने के पश्चात अपनी जन्मभूमि अयोध्या लौटे थे। उनके आगमन की खुशी में अयोध्यावासियों ने पूरे नगर को घी के दीयों से जगमगा दिया था, तभी से हर वर्ष दीपावली का यह पावन पर्व मनाया जाता है।
मां लक्ष्मी और गणेश पूजन: इस दिन धन, वैभव और समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी तथा बुद्धि के प्रदाता भगवान श्री गणेश की विशेष पूजा की जाती है, ताकि घर में सुख, शांति और खुशहाली का वास हो।
मांडा खास के काली माता चौराहे पर सुरक्षा और व्यवस्था के बीच लोगों ने एक-दूसरे को दीपावली की शुभकामनाएं दीं और पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल बना रहा।
