बरसात में गर्भवती महिलाएं रखें स्वास्थ्य का विशेष ध्यान- डॉ.सोनी कुशवाहा

बरसात में गर्भवती महिलाएं रखें स्वास्थ्य का विशेष ध्यान- डॉ.सोनी कुशवाहा

थोड़ी-सी सावधानी मां और शिशु दोनो को रखेगी सुरक्षित।

आदर्श सहारा टाइम्स

प्रयागराज। कोरांव यमुनानगर अन्तर्गत सुकृत हांस्पिटल कोरांव की डॉ.सोनी कुशवाहा एमबीबीएस. एमएस.एससीएलएस द्वारा गर्भवती महिलाओ को सावधानी बरतने की दी जानकारी।बरसात का मौसम अपने साथ हरियाली ठंडी फुहारे और सुकून लेकर आता है लेकिन यही मौसम अनेक संक्रामक बीमारियों और स्वास्थ्य सम्बन्धी चुनौतियो का कारण भी बनता है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं के लिए यह समय अतिरिक्त सतर्कता की मांग करता है। गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में कई शारीरिक और हार्मोनल परिवर्तन होते हैं, जिससे उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में बरसात के मौसम में होने वाली छोटी-सी लापरवाही भी मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के स्वास्थ्य पर गम्भीर प्रभाव डाल सकती है।

मानसून के दौरान मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ता है।डेंगू मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियां गर्भवती महिलाओं के लिए अधिक जोखिम पैदा कर सकती हैं। तेज बुखार, प्लेटलेट्स में कमी, शरीर में कमजोरी या निर्जलीकरण जैसी स्थितियां गर्भस्थ शिशु के विकास को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए घर के आसपास पानी जमा न होने दें, पूरी बांह के कपड़े पहनें, खिड़कियों पर जाली लगवाएं तथा चिकित्सक की सलाह के अनुसार सुरक्षित मच्छररोधी उपाय अपनाएं।

बरसात में दूषित पानी और भोजन के कारण पेट संबंधी संक्रमण, टाइफाइड, वायरल हेपेटाइटिस तथा दस्त जैसी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। गर्भवती महिलाओं को हमेशा ताजा और घर का बना भोजन करना चाहिए। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ, कटे हुए फल, बासी भोजन और अस्वच्छ स्थानों पर तैयार भोजन से बचना चाहिए। पीने के लिए हमेशा उबला हुआ या शुद्ध पानी ही प्रयोग करें। भोजन से पहले और शौचालय के बाद साबुन से हाथ धोने की आदत संक्रमण से बचाव का सबसे सरल और प्रभावी उपाय है।

गर्भावस्था के दौरान संतुलित आहार अत्यंत आवश्यक है। भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल, दालें, दूध, दही, या अन्य प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें। आयरन, कैल्शियम और फोलिक एसिड की दवाएं चिकित्सक के निर्देशानुसार नियमित रूप से लें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है, क्योंकि बरसात के मौसम में प्यास कम लगने के बावजूद शरीर को पानी की आवश्यकता बनी रहती है।

बरसात में फिसलन के कारण गिरने की संभावना अधिक रहती है। गर्भवती महिलाओं को जल्दबाजी में चलने से बचना चाहिए और फिसलन-रोधी, आरामदायक जूते पहनने चाहिए। यदि सड़क या सीढ़ियां गीली हों तो विशेष सावधानी बरतें। अनावश्यक यात्रा से बचें और यदि यात्रा करनी पड़े तो सुरक्षित साधनों का उपयोग करें।

मानसून में नियमित व्यायाम और हल्की शारीरिक गतिविधि भी लाभदायक होती है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार हल्की सैर, प्रेग्नेंसी योग या श्वास संबंधी व्यायाम किए जा सकते हैं। इसके साथ ही पर्याप्त आराम और सात से आठ घंटे की नींद मां और शिशु दोनों के स्वस्थ विकास के लिए आवश्यक है।

गर्भवती महिलाओं को नियमित प्रसवपूर्व जांच (एंटीनाटल चेकअप) कभी नहीं छोड़नी चाहिए। रक्तचाप वजन हीमोग्लोबिन रक्त शर्करा तथा शिशु के विकास की समय-समय पर जांच आवश्यक है। यदि तेज बुखार, लगातार उल्टी, पेट में तेज दर्द रक्तस्राव, हाथ-पैरों में अत्यधिक सूजन सांस लेने में तकलीफ या शिशु की हलचल कम महसूस हो तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। किसी भी प्रकार की दवा बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं लेनी चाहिए।

परिवार के सदस्यों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। गर्भवती महिला को स्वच्छ वातावरण पौष्टिक भोजन मानसिक शांति और भावनात्मक सहयोग मिलना चाहिए।तनाव और चिंता से दूर रहकर सकारात्मक सोच अपनाने से गर्भावस्था अधिक सुरक्षित और सुखद बनती है।

बरसात का मौसम डरने का नही बल्कि सतर्क रहने का मौसम है।यदि गर्भवती महिलाएं स्वच्छता संतुलित आहार नियमित जांच और चिकित्सकीय सलाह का पालन करें तो अधिकांश जोखिमों से आसानी से बचा जा सकता है।याद रखें स्वस्थ मां ही स्वस्थ शिशु की पहली नीव होती है। इसलिए इस मानसून में अपनी सेहत को प्राथमिकता दें,क्योंकि आपकी सुरक्षा ही आपके आने वाले शिशु के उज्ज्वल भविष्य की सबसे बड़ी गारंटी है।

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