प्रयागराज पुलिस कमिश्नर ने प्रयागराज की पूरी SOG टीम को भंग कर दिया
आदर्श सहारा टाइम्स
मांडा,प्रयागराज। पीयूष मोर्डिया पुलिस आयुक्त प्रयागराज ने प्रयागराज मे SOG टीम को किया भंग। मांडा की ड्रग फैक्ट्री के बाद उठे गंभीर सवालने जिले के मांडा थाना क्षेत्र के कोसड़ा कला गांव में खेत के बीच टीन शेड में चल रही कथित अवैध एमडी ड्रग फैक्ट्री का मुंबई क्राइम ब्रांच द्वारा भंडाफोड़ किए जाने के बाद प्रयागराज पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक मुंबई की मीरा-भायंदर-वसई-विरार पुलिस की अपराध प्रकटीकरण शाखा ने कार्रवाई करते हुए बड़ी मात्रा में एमडी ड्रग, रसायन और लैब उपकरण बरामद किए हैं। इस कार्रवाई में अब तक 21 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है।
रिपोर्टों के अनुसार मांडा के कोसड़ा कला में चल रही इस अवैध फैक्ट्री से 52 किलो 932 ग्राम एमडी बरामद हुई, जबकि पूरे नेटवर्क की कार्रवाई में बरामद एमडी की मात्रा करीब 69.759 किलोग्राम बताई गई है। ड्रग, रसायन और उपकरणों की अनुमानित कीमत लगभग 139 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
मुंबई पुलिस की कार्रवाई से सामने आया बड़ा नेटवर्क
बताया जा रहा है कि मुंबई पुलिस की जांच नालासोपारा में कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद आगे बढ़ी। पूछताछ और तकनीकी जांच के आधार पर जांच टीम प्रयागराज के मांडा क्षेत्र तक पहुंची। इसके बाद कोसड़ा कला गांव में खेत की जमीन पर बने टीन शेड में छापेमारी की गई, जहां कथित रूप से एमडी तैयार करने के लिए रसायन और प्रयोगशाला उपकरण मौजूद मिले।
इस कार्रवाई ने स्थानीय स्तर पर सुरक्षा और पुलिस की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है। सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यदि किसी ग्रामीण इलाके में लंबे समय से इतने बड़े पैमाने पर अवैध नशीले पदार्थों का निर्माण चल रहा था तो स्थानीय खुफिया तंत्र और संबंधित पुलिस इकाइयों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई। SOG टीम को लेकर भी उठे सवाल इसी बीच प्रयागराज की पूरी SOG टीम को भंग किए जाने की चर्चा सामने आ रही है। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक स्रोतों में इस समय इस कार्रवाई का कोई स्पष्ट आधिकारिक आदेश या ऐसा बयान नहीं मिला है जिसमें यह पुष्टि हो कि SOG को मांडा की ड्रग फैक्ट्री के कारण ही भंग किया गया है। इसलिए इस पहलू को फिलहाल सूत्रों/चर्चा के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि पुष्ट तथ्य के रूप में।
अगर वास्तव में SOG टीम को भंग किया गया है और यह कार्रवाई मांडा में सामने आई ड्रग फैक्ट्री के बाद हुई है, तो इसके पीछे के कारणों को लेकर कई सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। क्या स्थानीय स्तर पर सूचना संकलन में चूक हुई? क्या ड्रग नेटवर्क की गतिविधियों पर निगरानी नहीं थी? क्या किसी अधिकारी या पुलिसकर्मी की लापरवाही सामने आई? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
करोड़ों की ड्रग फैक्ट्री, स्थानीय पुलिस को भनक क्यों नहीं?
ग्रामीण क्षेत्र में खेत के बीच टीन शेड में कथित तौर पर ड्रग निर्माण की गतिविधि चलना अपने आप में गंभीर मामला है। बरामदगी में बड़ी मात्रा में रसायन और लैब उपकरण मिलने की बात सामने आई है। ऐसे में स्थानीय पुलिस की सूचना प्रणाली और निगरानी तंत्र की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि किसी पुलिस टीम की जानकारी में यह गतिविधि थी या नहीं, अथवा किसी पुलिसकर्मी की लापरवाही या मिलीभगत थी—इसका निष्कर्ष आधिकारिक जांच के बिना नहीं निकाला जा सकता।
अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच तेज मुंबई पुलिस की कार्रवाई के बाद अब पूरे मामले के अंतरराज्यीय और संभावित अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की भी जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में उत्तर प्रदेश के साथ महाराष्ट्र, गुजरात और अन्य राज्यों से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी की बात रिपोर्टों में कही गई है।
इतनी बड़ी मात्रा में बरामदगी के बाद जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाना बड़ी चुनौती होगी कि फैक्ट्री के पीछे कौन लोग थे, कच्चा माल कहां से आता था, तैयार ड्रग किन इलाकों में भेजी जाती थी और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।
अब पुलिस की अगली कार्रवाई पर नजर
मांडा की घटना ने प्रयागराज पुलिस की कार्यप्रणाली और स्थानीय खुफिया तंत्र पर बहस छेड़ दी है। यदि SOG टीम को लेकर सामने आई जानकारी आधिकारिक रूप से सही साबित होती है, तो यह भी महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस विभाग द्वारा इस निर्णय के पीछे क्या कारण बताए जाते हैं।
फिलहाल मांडा की कथित ड्रग फैक्ट्री के मामले में जांच जारी है और बरामदगी तथा गिरफ्तारियों के आधार पर नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि स्थानीय स्तर पर कोई गंभीर चूक हुई थी या नहीं और SOG को लेकर की गई कार्रवाई का इस मामले से वास्तव में कोई संबंध है या नहीं।
सबसे बड़ा सवाल यही है—मांडा के एक गांव में करोड़ों रुपये की कथित ड्रग फैक्ट्री चलती रही और इसकी जानकारी मुंबई की क्राइम ब्रांच तक पहुंच गई, लेकिन प्रयागराज के स्थानीय तंत्र को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? अब इस सवाल के जवाब पर क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूरे प्रयागराज की निगाहें टिकी हैं।
