प्रशासनिक उदासीनता और मनमानी की भेंट चढ़ा ‘बाबा बोलन नाथ धाम’ का ऐतिहासिक मेला
आदर्श सहारा टाइम्स
मेजा,प्रयागराज। मेजा खास स्थित ऐतिहासिक बाबा बोलन नाथ धाम का दो दिवसीय मेला (20 और 21 सितंबर) क्षेत्र की आस्था और संस्कृति का एक प्रमुख केंद्र है। इस आयोजन में प्रतिवर्ष 20 से 25 हजार से अधिक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, जहाँ दूर-दूर से लोग दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। लेकिन विडंबना यह है कि इतने बड़े और महत्वपूर्ण आयोजन के मुहाने पर खड़े होने के बावजूद, स्थानीय विकास खंड मेजा के अधिकारियों की उदासीनता और गैर-जिम्मेदाराना रवैये ने व्यवस्थाओं की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं।
मेले की शुरुआत में कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन विकास खंड की ओर से सहयोग न मिलने के कारण साफ-सफाई के कार्य में भारी विलम्ब हुआ है। जब रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों ने पंचायत अधिकारी से मेले के प्रांगण की साफ-सफाई को लेकर चर्चा की, तो उन्होंने गैर-जिम्मेदाराना लहजे में साफ शब्दों में मना कर दिया और कुतर्क दिया कि “रामलीला कमेटी ही कर्ता-धर्ता है, वही सफाई कराए, क्योंकि वह मेला प्रांगण की वसूली करती है।” एक जिम्मेदार लोक सेवक द्वारा इस प्रकार के अभद्र और गैर-जिम्मेदाराना शब्दों का प्रयोग न केवल प्रशासनिक मर्यादा के विरुद्ध है, बल्कि क्षेत्र की जनता और सनातन आस्था का खुला अपमान भी है।
डीपीआरओ के आदेशों की सरेआम धज्जियां
हैरानी की बात यह है कि जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) द्वारा पूर्व में ही यह सख्त निर्देश दिए जा चुका है कि कोई भी सफाई कर्मचारी विकास खंड परिसर में संबद्ध या संलग्न नहीं रहेगा। इसके बावजूद, एडीओ पंचायत के सीधे संरक्षण और रहनुमाई में 8 से 10 सफाई कर्मचारी—जिनमें मूलचंद्र विद्यार्थी, मुकेश कुमार, प्रेम शंकर, विपिन मौर्या, अमित कुमार, अजय चौधरी, विनोद सिंह और राकेश पांडेय शामिल हैं—ब्लॉक परिसर में बैठकर जी-हुजूरी कर रहे हैं।
दोहरे मापदंड और जनता में सुलगता आक्रोश
क्या ‘मेजा खास’ विकास खंड मेजा के अंतर्गत नहीं आता, जिसकी सुध ली जाए? अधिकारियों का यह रवैया गांवों और आयोजनों के प्रति उनके दोहरे मापदंडों को उजागर करता है। संलग्न तस्वीरों और वायरल लेटर में साफ देखा जा सकता है कि किस प्रकार प्रशासनिक उपेक्षा के कारण मेला क्षेत्र और उसके आसपास गंदगी के अंबार लगे हुए हैं।
एडीओ पंचायत और ब्लॉक में अवैध रूप से जमे सफाई कर्मचारियों की इस मनमानी के कारण क्षेत्र के लोगों और रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। जनता और जनप्रतिनिधि अब सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर शासन के आदेशों को ठेंगा दिखाने वाले इन भ्रष्ट अधिकारियों पर लगाम कब कसेगी?
समय आ गया है कि जिला के उच्च अधिकारी इस गंभीर प्रकरण का स्वतः संज्ञान लें, मेला प्रांगण में तत्काल युद्धस्तर पर सफाई व्यवस्था सुनिश्चित कराएं और एडीओ पंचायत तथा ब्लॉक में जमे अकरमण्य सफाई कर्मचारियों के खिलाफ कठोरतम अनुशासनात्मक कार्रवाई करें, अन्यथा क्षेत्र की जनता का आक्रोश कभी भी सड़कों पर फूट सकता है।
