ग्रामीण बैंक की सिरसा शाखा बनी उत्पीड़न का केंद्र,मैनेजर की तानाशाही से किसान, व्यापारी और महिलाएं त्रस्त
केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को लग रहा पलीता, जनता में भारी उबाल
बुजुर्गों और किसानों के बाद अब व्यापारियों और महिलाओं के साथ भी अभद्रता का आरोप, सामूहिक शिकायत की तैयारी
आदर्श सहारा टाइम्स
मेजा ,प्रयागराज । उत्तर प्रदेश सरकार भले ही बैंकिंग सेवाओं को आम जनता, ग्रामीणों और व्यापारियों के दरवाजे तक पहुंचाने का दावा कर रही हो, लेकिन उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की सिरसा शाखा के अधिकारियों का रवैया इन दावों की धज्जियां उड़ा रहा है। सिरसा शाखा में तैनात वर्तमान बैंक प्रबंधक (मैनेजर) की कार्यशैली और उपभोक्ताओं के प्रति उनके उद्दंड व अड़ियल व्यवहार के कारण क्षेत्र के हजारों खाताधारक बेहद परेशान हैं। ग्रामीणों, स्थानीय व्यापारियों और विशेषकर महिला खाताधारकों का आरोप है कि बैंक अब जनसेवा का माध्यम न रहकर आम जनता के मानसिक उत्पीड़न का केंद्र बन चुका है। काम के बदले चक्कर और बदसलूकी
क्षेत्र के किसानों, मजदूरों, बुजुर्ग पेंशनभोगियों और स्थानीय व्यापारियों ने बताया कि बैंक मैनेजर का व्यवहार अत्यंत तानाशाही पूर्ण है। वृद्धावस्था पेंशन, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) के लोन, व्यापारिक लोन या खाते से सामान्य लेन-देन जैसे जरूरी कामों के लिए भी उपभोक्ताओं को हफ्तों तक दौड़ाया जाता है। आरोप है कि जब कोई ग्रामीण, सीधा-साधा किसान, व्यापारी या महिला अपने काम की स्थिति जानने के लिए मैनेजर के केबिन में जाते हैं, तो उनके साथ सीधे मुंह बात नहीं की जाती और अत्यंत अभद्र व अपमानजनक भाषा का प्रयोग कर बाहर निकाल दिया जाता है। महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों के साथ दुर्व्यवहार शाखा में आने वाली महिला खाताधारकों और महिला स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) से जुड़ी महिलाओं ने आरोप लगाया कि बैंक मैनेजर का व्यवहार महिलाओं के प्रति अत्यंत असंवेदनशील और अपमानजनक है। सरकार द्वारा महिलाओं के स्वावलंबन के लिए चलाई जा रही योजनाओं के क्रियान्वयन में मैनेजर द्वारा जानबूझकर अड़ंगे लगाए जाते हैं। घूंघट और ग्रामीण परिवेश से आने वाली सीधी-सादी महिलाओं को जरूरी कागजी काम के बहाने घंटों लाइन में खड़ा रखा जाता है और पूछने पर डांटकर भगा दिया जाता है।
व्यापारियों में भारी आक्रोश, ठप हो रहा व्यापार बैंक मैनेजर के इस अड़ियल रवैये से स्थानीय व्यापारियों में भी भारी आक्रोश व्याप्त है। व्यापारियों का कहना है कि रोजमर्रा के बैंकिंग कामकाज, कैश जमा करने, और लिमिट/लोन से जुड़े मामलों में मैनेजर द्वारा अनावश्यक रुकावटें पैदा की जाती हैं। समय पर वित्तीय लेन-देन न होने के कारण स्थानीय व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि बैंक प्रबंधन का यही रवैया रहा तो वे बैंक का सामूहिक बहिष्कार करने पर मजबूर होंगे। सरकार की योजनाओं पर फिर रहा पानी
स्थानीय समाजसेवियों और प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि डिजिटल इंडिया और ग्रामीण विकास के इस दौर में बैंक मैनेजर का यह रवैया सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों को बदनाम कर रहा है। समय पर लोन या आर्थिक मदद न मिलने के कारण कई गरीब परिवारों के जरूरी काम रुके हुए हैं। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं, व्यापारियों और वरिष्ठ नागरिकों को उठानी पड़ रही है, विपरीत मौसम में भी बैंक के चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ता है। मैनेजर की इस उद्दंडता और विभागीय शिथिलता को लेकर अब सिरसा क्षेत्र की जनता, महिला संगठनों और व्यापारी समाज का धैर्य जवाब दे रहा है। आक्रोशित खाताधारकों, किसान, ग्रामीणों, महिलाओं और व्यापारियों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक (Regional Manager) और उच्च प्रबंधन ने इस मामले का तुरंत संज्ञान नहीं लिया और आरोपी मैनेजर के खिलाफ तत्काल दंडात्मक या स्थानांतरण (Transfer) की कार्रवाई नहीं की, तो किसान व ग्रामीण और व्यापारी बैंक मुख्यालय पर तालाबंदी और उग्र प्रदर्शन के लिए मजबूर होंगे। साथ ही, उपभोक्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल इस पूरे मामले की लिखित शिकायत साक्ष्यों के साथ सीधे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के बैंकिंग लोकपाल को भेजने की तैयारी कर रहा है।
