माता-पिता का पूजन करके मनाया गया अनोखा प्रेम दिवस

माता-पिता का पूजन करके मनाया गया अनोखा प्रेम दिवस

आदर्श सहारा टाइम्स

प्रयागराज। 14 फरवरी को प्रयागराज, बाई का बाग स्थित पार्क में एक अनोखा प्रेम दिवस मनाया गया। जैसे भगवान गणपति अपने माता पिता की पूजा प्रदक्षिणा कर प्रथम पूजनीय बने। वैसे ही यहाँ पर बच्चों ने माता-पिता को विधिवत मंत्रोच्चार के साथ आसन पर बिठाकर फूल-मालाएँ पहनायीं, तिलक किया और हाथों में पूजा की थाली लेकर पूजा-अर्चना की। फिर माता-पिता ने बच्चों को हृदय से लगा लिया और शुभ आशीष दी । भारतीय परम्परा की इस झलक को देखकर माता-पिता सहित उपस्थित अन्य लोगों की भी आँखें गीली हो गयीं।

इस प्रेम पर्व के साक्षी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महापौर श्री गणेश केसरवानी जी सहित कई अन्य गणमान्य जन पार्षद उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में उपस्थित मान्यवरों ने श्री योग वेदांत सेवा समिति के इस सुंदर पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा की ।

उल्लेखनीय है कि संत  आशारामजी बापू ने भारतीय संस्कृति की नीव सुदृढ़ करने हेतु पाश्चात्य विकारों से संस्कारों की ओर बढ़ने के लिए 14 फरवरी को ‘मातृ-पितृ पूजन दिवस’ मनाने की शुरुआत सन 2006 में की थी जो आज विश्वव्यापी रूप ले चुका। लोगों को यह कार्यक्रम इतना पसंद आया कि आज भारत ही नहीं, विदेशों में भी मातृ-पितृ पूजन दिवस मनाया जाने लगा है । इस कार्यक्रम का हिन्दू, मुसलमान, सिक्ख, ईसाई, पारसी – सभी धर्मों के लोगों ने हृदयपूर्वक स्वागत किया है । समाज के सभी तबकों द्वारा इस दैवी कार्य के स्वागत का एक कारण यह भी है कि धर्म-जाति की परिधि से ऊपर उठकर इसमें सबके मंगल की भावना निहित है ।
कार्यक्रम में उपस्थित अभिभावकगण व पूरे जनसमूह ने उक्त आयोजन को खूब सराहा और भविष्य में ऐसे और भी आयोजन होते रहें, ऐसी इच्छा जाहिर की।
बच्चों ने भी वेलेंटाइन डे के बजाय अपने माता-पिता और गुरुजनों का आदर-सम्मान करने के इस दिन को प्रत्येक साल मनाने का संकल्प लिया ।
प्रयागराज आश्रम संचालक  मनोज भाई ने बताया कि ये पर्व आज भारत ही नहीं समूचे विश्व में भी मनाया जाने लगा। इस पर्व से हमारी संस्कृति व संस्कारों की सुवास से भारत पुनः विश्वगुरु की ओर अग्रसर होगा। कार्यक्रम में श्री योग वेदांत सेवा समिति प्रमुख  दिलीप जयसवाल, सचिव  राजेन्द्र केसरवानी, एस के वैश्य , के एल जायसवाल, युवा सेवा संघ एवम महिला उत्थान मंडल के पदाधिकारी व सैकड़ों माता पिता बच्चों के साथ उपस्थिति रहे।

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