जांच टीम पर ग्राम प्रधान-सचिव के दबाव का आरोप, विकास कार्यों में धांधली की जांच पर उठे सवाल
आदर्श सहारा टाइम्स
उरुवा, प्रयागराज।विकासखंड उरुवा अंतर्गत पकरी सेवार ग्रामसभा में विकास कार्यों में कथित अनियमितता और सरकारी धन के दुरुपयोग को लेकर की गई शिकायत के बाद हुई जांच प्रक्रिया पर शिकायतकर्ता ने सवाल उठाए हैं। गांव निवासी राजेंद्र प्रसाद तिवारी ने ग्राम प्रधान पर सड़क, नाली, आंगनबाड़ी, हैंडपंप रिबोर, पंचायत भवन के सौंदर्यीकरण सहित विभिन्न कार्यों में अनियमितता बरतने का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी प्रयागराज से शिकायत की थी।
शिकायतकर्ता के अनुसार, ग्राम प्रधान द्वारा कई विकास कार्यों के नाम पर कथित तौर पर एमबी, बिल-बाउचर तैयार कर भुगतान करा लिया गया, जबकि मौके पर कई कार्य या तो हुए ही नहीं अथवा मानक के अनुरूप नहीं कराए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन स्थानों पर सड़क का निर्माण कराया गया, वहां घटिया गुणवत्ता की ईंटों का प्रयोग किया गया और कई जगह सड़क अधूरी है। इसी तरह जल निकासी के लिए बनाई गई नालियां भी निर्माण के कुछ समय बाद ही क्षतिग्रस्त हो गईं।
शिकायत में हैंडपंप रिबोर को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि जिन परिवारों के यहां हैंडपंप रिबोर की आवश्यकता थी, वहां कार्य कराने के बजाय कथित रूप से दूसरे लोगों के यहां रिबोर का कार्य दिखाया गया।
मामले को जिलाधिकारी ने संज्ञान में लेते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी को जांच टीम गठित करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद 8 जनवरी को अपर जिला कृषि अधिकारी विकास मिश्रा और अवर अभियंता मांडा को जांच के लिए नामित किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच टीम ने मौके पर पहुंचकर शिकायत में उठाए गए सभी बिंदुओं की जमीनी स्तर पर पर्याप्त जांच नहीं की और उसे जानकारी दिए बिना अभिलेखों के आधार पर जांच पूरी कर ली।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि अभिलेखों में जिन लोगों को लाभार्थी दर्शाया गया था, उनसे यह जानने का प्रयास नहीं किया गया कि वास्तव में उन्हें सरकारी योजना अथवा संबंधित विकास कार्य का लाभ मिला भी है या नहीं। इस पर आपत्ति जताए जाने के बाद हैंडपंप रिबोर की पुष्टि के लिए सहायक विकास अधिकारी कृषि, उरुवा को भेजा गया। 11 जुलाई को सहायक विकास अधिकारी कृषि ने पंचायत भवन में अभिलेखों का सत्यापन किया और रिपोर्ट तैयार कर वापस लौट गए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि मौके पर हैंडपंपों की वास्तविक स्थिति की पर्याप्त पड़ताल किए बिना ही रिबोर कार्य की पुष्टि कर दी गई। राजेंद्र प्रसाद तिवारी ने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव का प्रभाव जांच प्रक्रिया पर पड़ रहा है, जिसके कारण विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं की वास्तविकता सामने नहीं आ पा रही है। उन्होंने मांग की है कि निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय टीम गठित कर सभी विकास कार्यों की जमीनी जांच, अभिलेखों का सत्यापन और संबंधित लाभार्थियों के बयान दर्ज कराए जाएं। शिकायतकर्ता ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते मामले की निष्पक्ष जांच कर विकास कार्यों में कथित धांधली का खुलासा नहीं किया गया तो वह जिलाधिकारी कार्यालय पर आमरण अनशन करने के लिए बाध्य होंगे। वहीं इस संबंध में अपर जिला कृषि अधिकारी विकास मिश्रा ने बताया कि मौके पर जांच की गई थी। उनके अनुसार, जांच के दौरान कुछ अनियमितताएं सामने आई थीं तथा ग्राम प्रधान और सचिव की ओर से कई कार्यों से संबंधित उचित अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए, जिससे जांच प्रभावित हुई। उन्होंने बताया कि जांच रिपोर्ट तैयार कर जिला पंचायत राज अधिकारी को सौंप दी गई है।
अब सवाल यह है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता क्या है और ग्रामसभा में दर्ज विकास कार्य धरातल पर कितने हुए हैं। ग्रामीणों की निगाहें उच्चाधिकारियों की आगामी कार्रवाई और निष्पक्ष जांच पर टिकी हैं।
