बेमौसम बारिश और आंधी ने किसानों की कमर तोड़ी, समाजसेवी शैलेश कुमार कुशवाहा ने सरकार से की मुआवजे की मांग
आदर्श सहारा टाइम्स
मेजा, प्रयागराज | जनपद के मेजा, मांडा, कोरांव और करछना समेत कई इलाकों में आज सुबह से ही कुदरत का कहर देखने को मिला। तेज हवाओं के साथ हुई झमाझम बारिश ने अन्नदाता की साल भर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। बेमौसम हुई इस बारिश और आंधी की वजह से खेतों में खड़ी गेहूं और सरसों की फसलें पूरी तरह जमींदोज हो गई हैं।
फसलों को भारी क्षति:
बता दें कि इन इलाकों में गेहूं और सरसों की फसल पक कर पूरी तरह तैयार थी। किसानों को उम्मीद थी कि इस बार पैदावार अच्छी होगी, लेकिन अचानक आए मौसम के इस बदलाव ने सब कुछ चौपट कर दिया। तेज आंधी के कारण पौधे टूट गए हैं और खेतों में खड़ी हुई और कटी फसलों के दानों के खराब होने का खतरा बढ़ गया है। किसानों का अनुमान है कि इस आपदा से पैदावार में 50 प्रतिशत से भी अधिक की गिरावट आएगी।
ठंडक तो लौटी, पर बढ़ी चिंता:
इस बारिश से आम लोगों को गर्मी से राहत मिली है और मौसम में ठंडक लौट आई है, लेकिन अनाज और सब्जियों की खेती करने वाले किसानों के लिए यह ‘आसमानी आफत’ साबित हुई है। फिलहाल क्षेत्र में रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला जारी है, जिससे किसानों की चिंताएं और गहरा गई हैं।
समाजसेवी ने उठाई मुआवजे की मांग:
मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्र के प्रमुख समाजसेवी शैलेश कुमार कुशवाहा ने प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित किया है। उन्होंने कहा कि, “किसान पहले से ही कई समस्याओं से जूझ रहा है, ऐसे में इस बेमौसम बारिश ने उनकी बची-कुची उम्मीदें भी तोड़ दी हैं।”
शैलेश कुमार कुशवाहा ने जिलाधिकारी और उत्तर प्रदेश सरकार से पुरजोर मांग की है कि:
प्रभावित गांवों में तत्काल राजस्व विभाग (लेखपाल/कानूनगो) की टीम भेजकर नुकसान का सटीक सर्वे कराया जाए।
नुकसान का आकलन कर पीड़ित किसानों को अविलंब उचित आर्थिक मुआवजा प्रदान किया जाए।
किसानों का कहना है कि अगर सरकार से समय रहते मदद नहीं मिली, तो उनके सामने जीवन-यापन और अगली फसल की बुवाई का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।
