बीआरसी उरुवा में एफएलएन प्रशिक्षण का दूसरा बैच शुरू
प्रशिक्षण के दूसरे बैच में 100 शिक्षक ले रहे प्रशिक्षण
आदर्श सहारा टाइम्स
उरुवा ,प्रयागराज। बीआरसी उरुवा के सभागार में एफएलएन तथा एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तकों पर आधारित भाषा एवं गणित विषय का पांच दिवसीय ” फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरसी ” प्रशिक्षण के दूसरे बैच का शुभारंभ कल मंगलवार 11 अगस्त 2026 को हुआ। प्रशिक्षण का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के उद्देश्य से,शिक्षकों के लिए बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता प्रशिक्षण के कार्यक्रम का लक्ष्य बच्चों में मजबूत शैक्षिक नीवं रखना है। ताकि ” बुनियाद शक्तिशाली तो शिक्षा सार्थक ” का संदेश साकार हो सके और देश के भविष्य को गढ़ने में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। वहीं एआरपी एवं प्रशिक्षण सन्दर्भदाता अजीत मिश्रा ने कहा कि यह प्रशिक्षण शिक्षकों को बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को अधिक रोचक और प्रभावी बनाने में मदद करेंगा और यह प्रशिक्षण एनसीआरटी की पाठ्य पुस्तकों पर आधारित है। इसका उद्देश्य शिक्षकों को खेल-खेल में पढ़ने के तरीके से अवगत कराना है और समस्त शिक्षकों को पूर्ण मनोयोग से प्रशिक्षण प्राप्त कर उसे बच्चों तक पहुंचाने की अपील की। प्रशिक्षण में बुनियादी शिक्षा की महत्ता पर विशेष ध्यानाकर्षित किया जा रहा है। कक्षा तीन में एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तकों के लागू होने के बाद ब्लॉक के बच्चों में भाषाई प्रवीणता, गणितीय दक्षता एवं अंग्रेजी भाषा में निपुणता प्राप्त करने में सहजता होगी। विशेषतः कक्षा 3 में किताबों में बदलाव,बच्चों के बदलते परिदृश्य के साथ-साथ सजक एवं प्रतियोगिता से जुड़ाव का महती उपयोग है। वहीं पूर्व एआरपी एवं प्रशिक्षण सन्दर्भदाता राजेश मिश्रा ने कहा कि प्राथमिक कक्षाओं में बच्चों को भाषा और गणित की मजबूत नींव प्रदान करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्राथमिक स्तर पर बच्चों को खेल-खेल में, गतिविधि आधारित शिक्षण एवं रुचिकर शिक्षण पद्धतियों से जोड़कर ही शिक्षा के स्तर में गुणात्मक सुधार लाया जा सकता है।गतिविधि आधारित शिक्षण: शिक्षकों को नई एनसीईआरटी/राज्य पाठ्यपुस्तकों और टीएलएम के उपयोग द्वारा शिक्षण को सहज बनाने की तकनीक बताई जाएगी। निपुण लक्ष्य की प्राप्ति कक्षा 1 से 3 तक के बच्चों को समझ के साथ पढ़ने और बुनियादी गणितीय गणनाओं में निपुण बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। शिक्षण-अधिगम सामग्री के प्रयोग और रचनात्मक मूल्यांकन के तरीकों पर संदर्भदाताओं द्वारा विस्तृत प्रकाश डाला जाएगा। दूसरे बैच के प्रशिक्षण सत्र में एआरपी संदर्भदाता के रूप में पूर्व एआरपी राजेश मिश्रा, एआरपी रामानन्द शुक्ला, अजीत मिश्रा, जगदीश मिश्रा व प्रमोद शुक्ला द्वारा उपस्थित शिक्षकों को निपुण भारत की रूपरेखा, बाल-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों एवं वर्कबुक के सही के बारे में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के अंत में एआरपी सन्दर्भदाता अजीत मिश्रा द्वारा सभी संभागियों को अपनी-अपनी कक्षाओं में इन तकनीकों को प्रभावी रूप से लागू करने का संकल्प दिलाया गया। उक्त अवसर पर राजीव लोचन शुक्ला, दिवाकर राव, इंदु सिंह, पशुपति नाथ, वीरेंद्र कुमार, रश्मि साहू, पूनम दुबे, बिंदु सिंह, निसार अहमद, सविता मिश्रा, अर्जुन सिंह, शिप्रा श्रीवास्तव, कमलेश यादव, कमरुल हसन, शशीकांता सैनी, समरेंद्र कुमार, साधना शुक्ला व अशोक कुमार सिंह आदि विभिन्न प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षक, शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।
