चम्पतपुर में विकास कार्यों के नाम पर अनियमितता के आरोप, जांच के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में आक्रोश

चम्पतपुर में विकास कार्यों के नाम पर अनियमितता के आरोप, जांच के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में आक्रोश

आदर्श सहारा टाइम्स

प्रयागराज। यमुनापार क्षेत्र के चाका विकासखंड अंतर्गत चम्पतपुर गांव में ग्राम प्रधान के कार्यकाल के दौरान कराए गए विकास कार्यों को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कई विकास कार्य कागजों पर दर्शाकर सरकारी धनराशि निकाले जाने की शिकायत सामने आई है, जबकि मौके पर संबंधित कार्य या तो हुए ही नहीं अथवा मानक के अनुरूप नहीं कराए गए।
गांव निवासी सुनील सिंह ने इस मामले को लेकर आईजीआरएस के माध्यम से उच्च अधिकारियों से शिकायत कर जांच की मांग की थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि शिकायत के बाद अधिकारियों की ओर से मौके पर जांच भी की गई, लेकिन जांच पूरी होने के बावजूद न तो शिकायत पर स्पष्ट रिपोर्ट लगाई गई और न ही शिकायतकर्ता अथवा ग्रामीणों को जांच के परिणाम की जानकारी दी गई। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार गांव में रिबोर के नाम पर करीब 32 कार्य कागजों में दिखाए जाने की बात सामने आई है। आरोप यह भी है कि एक ही सड़क को दो से तीन बार अलग-अलग कार्य के रूप में दर्शाया गया, जबकि मौके पर वास्तविक रूप से अपेक्षित विकास कार्य दिखाई नहीं दे रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि एक ही सड़क पर बार-बार सरकारी धनराशि खर्च दिखाई गई है तो इसकी निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि प्रत्येक कार्य के लिए कितनी धनराशि स्वीकृत हुई, कितनी राशि निकाली गई और मौके पर वास्तव में कितना कार्य कराया गया।
शिकायतकर्ता सुनील सिंह का कहना है कि उन्होंने किसी व्यक्तिगत विवाद के कारण नहीं, बल्कि सरकारी धन के सही उपयोग और गांव के विकास कार्यों में पारदर्शिता के उद्देश्य से शिकायत की है। उनका आरोप है कि आईजीआरएस पर शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित अधिकारियों द्वारा जांच तो की गई, लेकिन जांच के बाद कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं की गई। इससे शिकायतकर्ता को यह भी पता नहीं चल पा रहा है कि जांच में अधिकारियों को मौके पर क्या स्थिति मिली और जांच के आधार पर क्या निष्कर्ष निकाला गया।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि विकास कार्य वास्तव में कराए गए हैं तो संबंधित विभाग को कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन, मस्टर रोल, भुगतान विवरण, तकनीकी स्वीकृति, माप पुस्तिका और संबंधित अभिलेखों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं यदि कागजों में कार्य दिखाकर धनराशि निकाले जाने की शिकायत सही पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
इस मामले को लेकर ग्रामीणों में रोष है। ग्रामीणों ने चाका ब्लॉक एवं जिला प्रशासन के उच्च अधिकारियों से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जांच ऐसी एजेंसी या अधिकारी से कराई जाए, जो पहले की जांच से जुड़े न हों, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
ग्रामीणों ने मांग की है कि गांव में दर्शाए गए सभी विकास कार्यों का मौके पर स्थलीय सत्यापन कराया जाए और कागजों में दर्ज कार्यों की तुलना धरातल पर कराए गए कार्यों से की जाए। विशेष रूप से रिबोर के बताए गए 32 कार्यों तथा एक ही सड़क को कथित तौर पर दो-तीन बार दर्शाए जाने के मामले की जांच कराई जाए।
हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। मामले में संबंधित ग्राम प्रधान, विकासखंड और विभागीय अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। ग्रामीण अब उच्च अधिकारियों से जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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