गंगा पूजन के साथ शंकराचार्य जी ने किया “गो प्रतिष्ठा प्रेरणा यात्रा” का शुभारंभ,पहले दिन पहुँचे 130 शिविर
आदर्श सहारा टाइम्स
प्रयागराज। गंगा तट पर चल रहे माघ मेला में गंगा पूजन, गौ व गणेश आराधना के साथ ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी ने आज “गो प्रतिष्ठा प्रेरणा यात्रा” का विधिवत शुभारंभ किया।
गंगा पूजन के पश्चात यात्रा का प्रारम्भ प्रातः 10:00 बजे सेक्टर 4 महावीर मार्ग पीपा पुल संख्या 1 के समीप स्थित श्री निम्बार्क सनातन सेवा शिविर से हुआ।तत्पश्चात माघ मेले के विभिन्न अखाड़ों एवं संत-शिविरों का भ्रमण किया।
पहले ही दिन कुल 130 शिविरों में पहुँचकर शंकराचार्य जी ने संत-महात्माओं एवं शिविर प्रतिनिधियों को गौ रक्षा के लिए संकल्पित कराया, तथा उन्हें “गौ माता राष्ट्र माता” आंदोलन से जुड़ने हेतु प्रेरित किया।
सभी शिविरों में संतों ने शंकराचार्य जी का भव्य स्वागत किया एवं आंदोलन में सक्रिय भागीदारी एवं सम्पूर्ण सहयोग देने का संकल्प व्यक्त किया।
शंकराचार्य जी ने यात्रा के दौरान कहा कि:
“गौ-माता केवल एक पशु नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, कृषि, अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य और अध्यात्म का मूल आधार हैं। आज आवश्यकता है कि संत समाज आगे आए और राष्ट्र को पुनः गौ-संरक्षण के पथ पर प्रेरित करे।”
इस प्रेरणादायी यात्रा में दंडी संन्यासी स्वामी प्रत्यक्चैतन्य मुकुंदानंद गिरी ,स्वामी अप्रमेय शिवशाक्षत कृतानंद गिरी , ब्रह्मचारी सहजानंद , ब्रह्मचारी तीर्थानंद , ब्रह्मचारी श्रवणानंद ,अखिलेश ब्रह्मचारी, देवेन्द्र पांडे गोप , कमलेश कुकरेती,
सक्षम सिंह योगी, जलयोद्धा आर्य शेखर , आचार्य मानव,
संत भारत दास , राम त्रिपाठी ,विमल कृष्ण, अंगद पांडे ,आदेश सोनी, पियूष तिवारी सहित सैकड़ों भक्त उपस्थित रहे।
यात्रा के माध्यम से शंकराचार्य जी ने संत समाज को यह संदेश दिया कि गौ-संरक्षण केवल आंदोलन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना का विषय है और इसे जन-जन तक पहुँचाने की आवश्यकता है।
यात्रा का समापन 2:00 बजे सिंडोला बाला जी धाम खालसा रामानंद मार्ग पर हुआ ।
यात्रा के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए जगतगुरु शंकराचार्य जी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगिराज जी ने बताया कि —
गो प्रतिष्ठा प्रेरणा यात्रा माघ मेला अवधि में अगले दस दिन तक निरंतर चलेगी और शंकराचार्य जी स्वयं माघ मेला क्षेत्र में लगे समस्त शिविरों में जाएँगे। उद्देश्य यह है कि संत समाज के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर गौ-संरक्षण का एक सांस्कृतिक एवं वैदिक अभियान स्थापित किया जाए।
