बसंत पंचमी का पर्व ज्ञान, संस्कार और साधना का प्रतीक : कालिका दास महाराज
आदर्श सहारा टाइम्स
प्रयागराज। बसंत पंचमी का पावन पर्व श्रद्धा, भक्ति और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर बरम बाबा धाम जनकल्याण सेवा समिति से जुड़े संत कालिका दास महाराज ने बसंत पंचमी के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए युवाओं और श्रद्धालुओं से विधिवत पूजा-अर्चना करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बसंत पंचमी केवल ऋतु परिवर्तन का पर्व नहीं है, बल्कि यह जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, ज्ञान और संस्कारों के संचार का अवसर है।
कालिका दास महाराज ने बताया कि बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा का विशेष महत्व है। मां सरस्वती ज्ञान, विद्या, बुद्धि और विवेक की अधिष्ठात्री देवी हैं। इस दिन उनकी आराधना करने से विद्यार्थियों में एकाग्रता बढ़ती है और जीवन में सही दिशा प्राप्त होती है। उन्होंने युवाओं से विशेष रूप से अपील करते हुए कहा कि आज के भौतिक युग में युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों से जुड़ना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को बसंत पंचमी के दिन पूजा-पाठ के साथ-साथ अपने लक्ष्य के प्रति संकल्प लेना चाहिए। मां सरस्वती की कृपा से ही व्यक्ति अज्ञान से ज्ञान की ओर अग्रसर होता है। उन्होंने यह भी कहा कि पीले वस्त्र धारण करना, पीले पुष्प अर्पित करना और सरस्वती वंदना का पाठ करना इस दिन विशेष फलदायी माना गया है।
कालिका दास महाराज ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे इस पावन दिन को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखें, बल्कि पूरे मनोयोग से पूजा करें और अपने जीवन में सदाचार, संयम और सेवा भाव को अपनाएं। उन्होंने कहा कि बसंत पंचमी समाज में सौहार्द, शांति और सद्भावना का संदेश देती है।
अंत में उन्होंने कामना की कि मां सरस्वती की कृपा से सभी के जीवन में ज्ञान का प्रकाश फैले, युवाओं का भविष्य उज्ज्वल हो और समाज धर्म, संस्कार व सद्भाव के मार्ग पर आगे बढ़े।
