हाइडिल कर्मचारी पर विभागीय भूमि पर कथित कब्जे का आरोप, संपत्ति की जांच और आरटीआई से मांगी जानकारी; विभागीय कार्रवाई पर टिकी सबकी निगाहें

हाइडिल कर्मचारी पर विभागीय भूमि पर कथित कब्जे का आरोप, संपत्ति की जांच और आरटीआई से मांगी जानकारी; विभागीय कार्रवाई पर टिकी सबकी निगाहें

आदर्श सहारा टाइम्स

पिपरी (सोनभद्र)। उत्तर प्रदेश राज्य जल विद्युत निगम लिमिटेड (UPJVNL) में कार्यरत श्याम लाल (पेट्रोल मैन) के विरुद्ध विभागीय भूमि पर कथित अतिक्रमण और अवैध निर्माण को लेकर गंभीर शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संबंधित कर्मचारी ने अपने आवंटित आवास के अतिरिक्त विभागीय/सरकारी भूमि पर बड़े पैमाने पर कब्जा कर निर्माण कराया तथा अपने भाई-भतीजों को भी विभागीय भूमि पर कब्जा कराने में भूमिका निभाई।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि संबंधित कर्मचारी के पास पहले से आवास उपलब्ध होने के बावजूद अतिरिक्त विभागीय भूमि पर निर्माण कराया गया तथा विभागीय भूमि के दुरुपयोग का मामला लंबे समय से सामने होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। शिकायत में कहा गया है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह विभागीय नियमों के उल्लंघन के साथ-साथ सरकारी संपत्ति के संरक्षण पर भी गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
शिकायत में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषी पाए जाने पर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई करने तथा जांच पूरी होने तक संबंधित कर्मचारी के सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान पर रोक लगाने की मांग की गई है। साथ ही संबंधित कर्मचारी की चल एवं अचल संपत्तियों तथा आय के स्रोतों की भी जांच कराए जाने की मांग उठाई गई है, ताकि यदि किसी प्रकार की अनियमितता हो तो उसकी निष्पक्ष जांच की जा सके।
मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए शिकायतकर्ता ने रिहंद कॉलोनी सिविल अनुरक्षण खंड, पिपरी, सोनभद्र के अधिशासी अभियंता से सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत जन सूचना भी मांगी है। आरटीआई में विभागीय भूमि, कथित अतिक्रमण, उपलब्ध अभिलेखों तथा शिकायत पर विभाग द्वारा की गई अथवा प्रस्तावित कार्रवाई से संबंधित जानकारी मांगी गई है।
अब स्थानीय लोगों की निगाहें विभाग द्वारा की जाने वाली कार्रवाई और सूचना के अधिकार के तहत उपलब्ध कराई जाने वाली जन सूचना पर टिकी हैं। विभागीय जांच और आरटीआई से सामने आने वाले तथ्यों के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या विभागीय जांच का अंतिम निष्कर्ष अभी सामने आना शेष है।

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