पुत्र की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए रखा महिलाओं ने व्रत
माताओं की आस्था और संतान के प्रति अटूट प्रेम का प्रतीक है जीवितिया पर्व
आदर्श सहारा टाइम्स
कोरांव ,प्रयागराज। कोरांव क्षेत्र में भारतीय संस्कृति में अनेक ऐसे पर्व और व्रत हैं, जो माता और संतान के बीच अटूट प्रेम, त्याग और समर्पण का संदेश देते हैं। इन्हीं में से एक है यह व्रत तालाब,नदी,नहर,झील में नहा कर किया जाता है जीवित्पुत्रिका व्रत, जिसे आम बोलचाल में जीवितिया या जितिया व्रत भी कहा जाता है। यह व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना के लिए श्रद्धा एवं विश्वास के साथ रखती हैं।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जीवितिया व्रत का विशेष महत्व है। इस अवसर पर माताएं विधि-विधान से पूजा-अर्चना करती हैं और अपनी संतान की खुशहाली के लिए भगवान से प्रार्थना करती हैं। इस पर्व में माताओं का त्याग, प्रेम और ममता विशेष रूप से देखने को मिलता है। यह व्रत महिलाएं अपने बच्चों के लंबी उम्र के लिए रखती है कोरांव के आसपास कई गांवों में मनाया जाता है गांधी चौराहा, तराव,चांदी,खजुरी, दुधारा माइनर,आदि जगहों पे मनाया गया।जीवितिया व्रत विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड तथा आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। पर्व के अवसर पर घरों में धार्मिक वातावरण रहता है और महिलाएं परंपरागत रीति-रिवाजों का पालन करती हैं।यह पर्व केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि मां और संतान के बीच गहरे भावनात्मक रिश्ते को भी दर्शाता है। मां अपने बच्चों के सुखद जीवन और उज्ज्वल भविष्य के लिए हर संभव त्याग करने को तैयार रहती है। जीवितिया व्रत इसी मातृप्रेम, विश्वास और समर्पण की भावना को सशक्त रूप से प्रकट करता है। जीवितिया का संदेश: मां की ममता, संतान की खुशहाली और परिवार की सुखी के लिए उर्मिला देवी,उर्मिला देवी, कुंती देवी,सरोज देवी,रे श्मा देवी,पार्वती देवी ,सीता देवी,
प्रभावती देवी,यशोदा देवी आदि महिलाओं ने पूजा अर्चना की।
